‘यौमे पैदाइश पर ख़ास’- कविता, खुश रहो तुम सदा, यही है मेरी दुआ..

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मुस्कुराती है वो ठंडी हवा की मानिंद,

नाम उसका है सबा हवा की मानिंद।

अम्मी की है वो दुलारी,
पापा के थी वो एक नन्ही परी।

भाईयों का है वो तो वकार,
बहन पर करती है जाँनिसार।

अम्मी की खिदमत में लगी रहती है वो दिन-रात,
करती है वो कुर्बान अक्सर तमाम रात।

करती है वो घर के सभी काम मन लगाकर,
इबादत भी करती वो खूब दिल लगाकर।

घर में आ जाए कोई मुसीबत अगर,
रो-रो कर लेती है बुरा हाल अक्सर।

चाय-खाना भी बनाती है वो बहुत खूब,
आता है उसे कपड़े सिलने का हुनर बहुत खूब।

होंठों पर लिपिस्टिक लगाती है खूब,
चाॅकलेट,आइसक्रीम,बेसन के लड्डू करती वो पसंद खूब।

भांजी की शरारतों से रहती है वो तंग अक्सर,
मुंह चिढाकर जब भागती है उसे दौडाकर पकड़ती वो अक्सर।

खुदा की है वो एक नेक बंदी,
करती है खुदा की वक्त पर बंदगी।

दोस्ती का है उनका अंदाज़ सबसे मुनफरिद,
दोस्ती निभाने में है वो खूब हुनरमंद।

शीबू से करती है वो बेइंतिहा प्यार,
दोस्ती पक्की है पर होती भी है तकरार।

गर हुई मुझसे कभी कोई ख़ता,
माफ करती है वो एक पल में मेरी ख़ता।

याद करते है हम उसे हर पल,
दोस्त है वो मेरी सबसे जुदा।

रहो गमों से तुम दूर बहुत,
ज़िन्दगी में तुम्हें खुशियाँ मिले बहुत।

ऐ सबा तुम जब भी आना,
मेरी सबा के लिए महकती खुशबू लाना।

करती रहो तुम हमेशा खुदा की इबादत,
खुश रहो तुम सदा यही है मेरी दुआ।।

 

लेखक-ज़ाहिद अली

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