तेलंगाना में 6 लोगों की कोरोना से मौत, जमात के कार्यक्रम में आए थे दिल्ली…

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दिल्ली: देश में कोरोना वायरस का संकट बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच तेलंगाना सरकार ने बड़ा खुलासा किया है। तेलंगाना सरकार का कहना है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इन 6 लोगों में दो की मौत गांधी अस्पताल में जबकि एक-एक मौत अपोलो अस्पताल, ग्लोबल अस्पताल, निजामाबाद और गद्वाल में हुई है।

तेलंगाना मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि वे सभी, जो दिल्ली में मरकज प्रार्थना के लिए गए थे, उन्हें अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। सरकार उनका टेस्ट कराएगी और उन्हें मुफ्त में उपचार प्रदान करेगी। जिसको भी उनके बारे में जानकारी है, उन्हें सरकार और अधिकारियों को अलर्ट करना चाहिएअधिकारियों को अलर्ट करना चाहिए।

आपको बता दें कि 13-15 मार्च को निजामुद्दीन के मरकज में एक धार्मिक आयोजन किया गया था, इसमें करीब 300-400 लोग शामिल हुए थे। तेलंगाना से भी आकर इस कार्यक्रम में कई लोग शामिल हुए थे, जिनमें से 6 लोगों की आज कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो गई।

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीग-ए-जमात में कुछ दिन पहले आयोजित एक कार्यक्रम में 300 से 400 लोगों ने हिस्सा लिया था, उनमें से करीब 200 लोगों के कोरोना से संक्रमित होने की आशंका जताई गई है। इनमें से करीब 163 लोगों को हल्की खांसी-जुकाम की शिकायत के बाद दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, इस मामले के सामने आते ही हड़कंप मच गया, दिल्ली पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है।

दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निजामुद्दीन में तबलिग-ए-जमात बैठक के आयोजन के संबंध में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने कहा कि बिना अनुमति के ये कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें करीब 200 लोग शामिल हुए थे। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब हमें पता चला कि इस तरह का आयोजन किया गया था, तो हमने उन्हें कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के तहत निषेधाज्ञा और लगायी गई पाबंदियों का उल्लंघन करने के लिए नोटिस दिया।

अधिकारियों ने बताया कि निजामुद्दीन इलाके में कई लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया है और उनकी जांच की जा रही है। इस महीने की शुरुआत में, दिल्ली सरकार ने धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ 31 मार्च तक 50 से अधिक लोगों के विरोध प्रदर्शनों के लिए एकत्र होने पर भी रोक लगाई थी।

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