कोराना वायरस के चलते समय से इलाज ना हो पाने के कारण हृदय गति रुकने से अध्यापक की मौत…

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शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद में कोराना वायरस ने इस कदर लोगों के दिलों में भय उत्पन्न कर दिया है कि अब अन्य मर्जो से भी पीड़ित मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते स्वास्थ विभाग की लापरवाही के कारण बेमौत लोग काल के मुंह में समा रहे हैं तो लाक डाउन के चलते मरीजों को हॉस्पिटल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। जिसमें कहीं ना कहीं पुलिस बाधा उत्पन्न कर रही है जबकि सरकार के सख्त दिशानिर्देश हैं की किसी भी मरीज को हॉस्पिटल तक पहुंचाने में कोई बाधा उत्पन्न ना की जाए और जहां तक चले तो उसको तत्काल वहां तक पहुंचाया जाए लेकिन पुलिस अपनी पुरानी आदतों से बाज नहीं आ रही है। मामला शाहजहांपुर जिले के निगोही क्षेत्र का है जहां आदर्श इंटर कॉलेज निगोही के सेवानिवृत्त अध्यापक ओम प्रकाश वर्मा के बेटे प्रवीण कुमार वर्मा जो वर्तमान में कबीरपुर झोतूपुर जूनियर हाई स्कूल में अध्यपक थे।
बताया जा रहा है कि सोमवार दिनांक 23 मार्च को अध्यपक प्रवीण कुमार वर्मा 38 बर्ष के हृदय में अचानक तेज गति से दर्द होने लगा तो उनके परिजन प्रवीण को शाहजहांपुर जिले के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां पर डॉक्टर न मिलने के कारण प्रवीण कुमार को अपने प्राइवेट वाहन से बरेली ले जा रहे थे। जहां लॉक डाउन के चलते पीलीभीत बॉर्डर पर पहुंचेते ही खनंका चौकी पर पुलिस ने उनकी प्राइवेट गाड़ी को रोक लिया यहां काफी देर तक पुलिस से बहस बाजी चलती रही और परिजन प्रवीण कुमार के तेज गति से दर्द होने का हवाला देते हुए जल्दी जाने देने का आग्रह करते रहे उनकी गाड़ी को पुलिस ने आगे जाने से मना कर दिया तो प्रवीण कुमार के परिजनों ने देहात क्षेत्र के क्षतिग्रस्त रास्तों से किसी तरह बरेली के राममूर्ति अस्पताल में पहुंचाया। जिसमें उन्हें घंटों अतिरिक्त समय लगा जहां डॉक्टरों ने काफी देर तक कोराना का मरीज बता कर अध्यापक को भर्ती नहीं किया परिजनों ने बताया की इनको अचानक दर्द होने लगा है और काफी कुछ खुशामद के बाद डॉक्टरों ने भर्ती कराया जहां कई घंटों तक प्रवीण कुमार तड़पते रहे आखिरकार मौत की जंग लड़ते-लड़ते देर शाम करीब 9:00 बजे उनकी ह्रदयगति रुक जाने के कारण मौत हो गई। शायद पीलीभीत बॉर्डर खनंका चौकी की पुलिस एवं राम मूर्ति हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अंदर थोड़ी भी मानवता होती तो प्रवीण की जान बच सकती थी।

ब्यूरो रिपोर्ट: बीडी कनौजिया शाहजहांपुर.

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